कुछ खुशियाँ दे सकता था, लेकिन छोड़ो जाने दो!
क्या क्या कुछ हो सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!!
महफ़िल-ऐ-कफ-ओ-मस्ती थी ,एक सपनो की बस्ती थी!
दिल उसमे खो सकता था, लेकिन छोड़ो जाने दो!!
रोते रोते रात गयी, रात गयी सो बात गयी!
सोने को सो सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!!
वो चेहरे के दाग नहीं थे,दामन पर कुछ धब्बे थे!
छुप के कहीं धो सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!!
जो खुद भी मासूम हो वो, मुझ पे पहला वार करे!
इतना कह भी सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!!
कुछ खुशियाँ दे भी सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!
क्या क्या कुछ हो सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!!
वो चेहरे के दाग नहीं थे,दामन पर कुछ धब्बे थे!
प्रत्युत्तर देंहटाएंछुप के कहीं धो सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!!
...वाह! बहुत खूबसूरत जज्बात उकेरे हैं आपने.
आभार.
जबरदस्त है हर शेर....बहुत गज़ब!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंरोते रोते रात गयी, रात गयी सो बात गयी!
प्रत्युत्तर देंहटाएंसोने को सो सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!!
बेहद सादगी से दिल की बात कह गए जनाब, खूबसूरत...........
अब सोचने में वक़्त क्यूँ जाया करें - छोड़ो , जाने दो
प्रत्युत्तर देंहटाएंkuchh bhee chhod do
प्रत्युत्तर देंहटाएंpar badhiyaa gazlein likhnaa naa chhodnaa
वाह!!!
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत खूब सर...
वो चेहरे के दाग नहीं थे,दामन पर कुछ धब्बे थे!
प्रत्युत्तर देंहटाएंछुप के कहीं धो सकता था,लेकिन छोड़ो जाने दो!!
.....बहत खूब! बेहतरीन प्रस्तुति...
वाह, बहुत सुंदर प्रस्तुति । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है ।..
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