कोई तो हर्फ़े रसा ,दिल को जुबां तक लाता
लोग तो राह बताने में भी थक जाते है
तुम न होते तो मुझे कौन यहाँ तक लाता
हम को ही तरके तमन्ना की थी उजलत वरना ,
सिलसिला था के उस इनकार को "हाँ" तक लाता
मैं तो उस ख्वाब का कैदी था के जिस की ताबीर
मो'ज्ज़ा भी कोई क्या मेरे जहाँ तक लाता
Andohe bayaaN= abhivyakti ki/ kahne ki peeda
Terke tamanna= Tamanna ko chhodna
Mo’jza= Miracle/ Chamatkaar
Harfe rasaa= Pahunch paane wala/Samarth Akshar
( अखतर किदवई )
लोग तो राह बताने में भी थक जाते है
प्रत्युत्तर देंहटाएंतुम न होते तो मुझे कौन यहाँ तक लाता
बहुत खूब सर..
बहुत भावपूर्ण रचना के लिए बधाई |
प्रत्युत्तर देंहटाएंआशा
वाह
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहूत हि सुंदर प्रस्तुती...
waah...
प्रत्युत्तर देंहटाएंलोग तो राह बताने में भी थक जाते है
प्रत्युत्तर देंहटाएंतुम न होते तो मुझे कौन यहाँ तक लाता
अच्छी ग़ज़ल, जो दिल के साथ-साथ दिमाग़ में भी जगह बनाती है।
एक समृद्ध ब्लॉग। आज तक इससे दूर था, इसका अफसोस है। इसका फॉलोअर बन गया हूं।
हम को ही तरके तमन्ना की थी उजलत वरना ,
प्रत्युत्तर देंहटाएंसिलसिला था के उस इनकार को "हाँ" तक लाता
लोग तो राह बताने में भी थक जाते है
तुम न होते तो मुझे कौन यहाँ तक लाता
जैसा कि मनोज जी ने कहा एक समृद्ध ब्लॉग ...आभार इतनी अच्छी गज़लें पढवाने के लिये और उर्दू के कुछ शब्दों का अर्थ देकर सुगम्य बना दिया आपने
बेहद उम्दा ग़ज़ल
प्रत्युत्तर देंहटाएंगहरे भाव.सुन्दर प्रस्तुति. बधाई.
प्रत्युत्तर देंहटाएं