इन अंधेरों में भी कमी होगी सुबह आएगी, रौशनी होगी
मैं ने माना के आज तन्हां हूँ
कल मेरे साथ जिंदगी होगी
ख्वाब बिखरें है सूखे पत्तों से
फसले गुल पास आ गयी होगी
याद आ जाओ दिल बहल जाए
वरना हम होगें बेकसी होगी
तुमने दी थी शराब समझा था
क्या पता था के तिशनगी होगी
सुबहें होगी उतनी ही नजदीक
जितनी बिस्यार तीरगी होगी
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Tishnagi= Pyas; Subhe nau= nai subh
Bisyaar= zyadah (YahaaN par 'ghani'
Tergi= andhera
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(अखतर किदवई )
बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय......
प्रत्युत्तर देंहटाएंज़रूर होगी! शुभकामनायें!
प्रत्युत्तर देंहटाएं"याद आ जाओ, दिल बहल जाए-
प्रत्युत्तर देंहटाएंवरना हम होगें, बेकसी होगी".
वाह !!! , बहुत खूब..... सादर.
bahut khub ,,
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut hi badhiya gajal hai...
सुबहें होगी उतनी ही नजदीक
प्रत्युत्तर देंहटाएंजितनी बिस्यार तीरगी होगी
इसी इंतज़ार में बुरे से बुरा वक़्त कट जाता है....
अच्छी बेचैनी ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंअब कृपा हो ही जाए ।।
खूबसूरत!
प्रत्युत्तर देंहटाएंख्वाब बिखरें है सूखे पत्तों से
प्रत्युत्तर देंहटाएंफसले गुल पास आ गयी होगी ....बहुत खुबसूरत शेर .....
ख्वाब बिखरें है सूखे पत्तों से
प्रत्युत्तर देंहटाएंफसले गुल पास आ गयी होगी
ग़ज़ल के हर शे’र में एक सुंदर अहसास का पिरोया जाना इस ग़ज़ल की खासियत है।