तुम तो बाद अज़ मर्ग जन्नत के लिए सजदा नशीं हो
हमने याँ जन्नत बना ली रखके बस एक तीर दिल पर
खुदपरस्ती जब हो मज़हब खुद्सरी ईमान हो
बंध सकेगी किस तरह आखिर कोई ज़ंजीर दिल पर
कल मेरी बेख्वाब आँखों से जो डर कर बह गया था
लिख रही है इक तड़प उस ख्वाब की ताबीर दिल पर.
( अखतर किदवाई)
----------------------------------------------------------------------
खूँ चकां =जिस से खून टपक रहा हो
बाद अज़ मर्ग = मौत के बाद
सजदा नशीं हो = सजदा कर रहे हो
खुदपरस्ती =अपनी पूजा करना / खुद को सबसे अच्छ /बड़ा मानना
खुद्सरी = अपनीही करना / अपनी जिद पूरी करना






